Class 10 Hindi Meera Question Answers | Class 10 Hindi Chapter 2 NCERT Solutions

कक्षा 10 हिंदी – पद (मीरा) – NCERT Solutions

🎵 पद – मीराबाई

कक्षा 10 हिंदी स्पर्श – NCERT Solutions

📖 मीराबाई के बारे में

जन्म: 1503, चोकड़ी (कुड़की) गाँव, जोधपुर

जीवनकाल: 1503-1546

गुरु: संत रैदास

आराध्य: श्रीकृष्ण (गिरधर गोपाल)

विशेषता: मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की प्रमुख कवयित्री, दैन्य और माधुर्य भाव की भक्ति

(क) प्रश्नों के उत्तर
1 पहले पद में मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है?
हरि आप हरो जन री भीर।
द्रौपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रूप नरहरि, धर्‍यो आप सरीर।
बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुंजर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर॥

पहले पद में मीरा ने अत्यंत विनम्रता और भक्ति भाव से अपनी पीड़ा हरने की विनती की है:

1. ऐतिहासिक उदाहरण देकर: मीरा ने भगवान के पूर्व में भक्तों की रक्षा के उदाहरण प्रस्तुत किए हैं:

  • द्रौपदी की रक्षा: जब दुर्योधन ने द्रौपदी का चीरहरण करवाया, तब श्रीकृष्ण ने उनकी लाज बचाई और चीर को बढ़ाते रहे।
  • प्रह्लाद की रक्षा: भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए भगवान ने नरसिंह अवतार धारण किया।
  • गजराज की रक्षा: बूढ़े हाथी (गजराज) को मगरमच्छ के पीड़ा से मुक्ति दिलाई।

2. दासी भाव से: मीरा ने स्वयं को ‘दासी’ कहकर अत्यंत विनम्रता प्रकट की है।

3. पूर्ण समर्पण से: मीरा कहती हैं कि जिस प्रकार आपने अपने भक्तों की रक्षा की, उसी प्रकार मेरी पीड़ा भी दूर कीजिए। मैं आपकी दासी हूँ और पूर्णतः आप पर निर्भर हूँ।

2 दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती हैं? स्पष्ट कीजिए।
स्याम म्हाने चाकर राखो जी,
गिरधारी लाला म्हाँने चाकर राखोजी।
चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसन पास्यूँ।

मीराबाई श्याम की चाकरी करना चाहती हैं क्योंकि:

1. निरंतर दर्शन की इच्छा: चाकर बनकर रहने से वे प्रतिदिन श्रीकृष्ण के दर्शन कर सकेंगी और उनके निकट रह सकेंगी।

2. सेवा का अवसर: उन्हें अपने प्रभु की सेवा करने का अवसर मिलेगा जो उनके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य है।

3. आध्यात्मिक लाभ: चाकरी में उन्हें तीन चीजें मिलेंगी:

  • दर्शन: श्रीकृष्ण के दर्शन
  • स्मरण: निरंतर उनका स्मरण
  • भाव: दैन्य भाव
  • शैली: विनय और प्रार्थना शैली
3 चाकरी में दरसन पास्यूँ, सुमरन पास्यूँ खरची। भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।

भाव सौंदर्य:

  • चाकरी के तीन लाभ बताए हैं – दर्शन, स्मरण, भक्ति
  • भौतिक वेतन से अधिक आध्यात्मिक लाभ की कामना
  • तीनों बातें सरस (आनंददायक) हैं
  • भक्ति को जागीर (साम्राज्य) के रूप में प्रस्तुत किया

शिल्प सौंदर्य:

  • भाषा: राजस्थानी और गुजराती का मिश्रण (पास्यूँ, खरची, सरसी)
  • शब्द चयन: सरल और प्रभावशाली
  • अलंकार: अनुप्रास (पास्यूँ-पास्यूँ-पास्यूँ), संख्यावाचक (तीनूं)
  • रस: भक्ति रस
  • गुण: प्रसाद गुण
  • शैली: लोकगीत शैली, संगीतात्मक
📝 भाषा अध्ययन
1 निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए
पाठ में शब्द प्रचलित रूप अर्थ
री की संबंध सूचक
चीर चीर / वस्त्र कपड़ा, साड़ी
बूढ़तो बूढ़े / वृद्ध बूढ़ा, प्राचीन
धर्‍यो धारण किया धारण करना
लगास्यूँ लगाऊँगी लगाना (भविष्यत्काल)
कुंजर हाथी गजराज, हस्ती
घणा बहुत / अधिक बहुत ज्यादा
बिंद्रावन वृंदावन श्रीकृष्ण की लीलास्थली
सरसी सरस / आनंददायक रसीली, आनंदित करने वाली
रहस्यूँ रहूँगी रहना (भविष्यत्काल)
हिवड़ो हृदय / दिल मन, हृदय
राखो रखो / रखना रखना, संभालना
कुसुम्बी कुसुम के रंग की केसरिया/गुलाबी रंग

💐 मीरा की प्रमुख विशेषताएँ:

  • भक्ति भाव: श्रीकृष्ण के प्रति अगाध प्रेम और समर्पण
  • दैन्य भाव: स्वयं को दासी मानना
  • विरह वेदना: प्रभु से मिलने की तीव्र आकांक्षा
  • सांसारिक मोह से मुक्ति: भौतिक सुखों का त्याग
  • संगीतात्मक पद: गेय और लयबद्ध रचनाएँ
  • लोकभाषा का प्रयोग: सरल और सहज भाषा
🎯 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

याद रखने योग्य मुख्य बातें:

  • मीरा के दोनों पदों में श्रीकृष्ण के प्रति अटूट भक्ति और प्रेम प्रकट होता है
  • पहले पद में विनय भाव और दूसरे पद में सेवा भाव प्रमुख है
  • मीरा की भाषा राजस्थानी, ब्रज और गुजराती का मिश्रण है
  • दासी भाव और पूर्ण समर्पण मीरा की भक्ति की विशेषता है
  • द्रौपदी, प्रह्लाद और गजराज की कथाओं का उल्लेख है
  • चाकरी के तीन लाभ: दर्शन, स्मरण और भक्ति की जागीरी
-भक्ति की जागीरी: भक्ति का साम्राज्य

4. सांसारिक बंधनों से मुक्ति: श्याम की चाकरी में रहकर वे सांसारिक मोह-माया से मुक्त हो जाएंगी।

5. पूर्ण समर्पण: यह उनके पूर्ण समर्पण और एकनिष्ठ प्रेम का प्रतीक है। वे केवल अपने आराध्य की सेवा में ही जीवन व्यतीत करना चाहती हैं।

निष्कर्ष: मीरा के लिए श्रीकृष्ण की चाकरी करना सबसे बड़ा सौभाग्य है क्योंकि इससे उन्हें अपने प्रभु के निकट रहने और उनकी सेवा करने का अवसर मिलेगा।
3 मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है?
मोर मुगट पीताम्बर सौहै, गल वैजंती माला।
बिंद्रावन में धेनु चरावै, मोहन मुरली वाला।

मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया है:

1. वस्त्र और आभूषण:

  • मोर मुकुट: सिर पर मोर के पंखों का सुंदर मुकुट
  • पीताम्बर: पीले रेशमी वस्त्र जो उन्हें अत्यंत शोभा देते हैं
  • वैजयंती माला: गले में वैजयंती (पाँच रंगों के फूलों की माला)
  • कुसुम्बी साड़ी: कुसुम्बे के रंग की साड़ी

2. क्रियाकलाप:

  • धेनु चराना: वृंदावन में गायें चराना
  • मुरली वादन: मोहक मुरली बजाना
  • विभिन्न लीलाएँ: बृंदावन की गलियों में गोविंद लीला गाना

3. रंग-रूप:

  • साँवरिया: श्यामल (सांवले) रंग के

4. निवास स्थान: ऊँचा-ऊँचा महल और उसमें बीच-बीच में बारियाँ (बगीचे)

विशेषता: मीरा ने श्रीकृष्ण के रूप का वर्णन करते समय उनके प्रति अपने गहन प्रेम और आकर्षण को प्रकट किया है। हर विवरण में उनकी भक्ति और समर्पण झलकता है।
4 मीराबाई की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।

मीराबाई की भाषा-शैली की प्रमुख विशेषताएँ:

1. मिश्रित भाषा:

  • राजस्थानी: री, म्हाने, राख्यो, घणो
  • ब्रज: गिरधारी, बृंदावन, गोविंद
  • गुजराती: पास्यूँ, रहस्यूँ, लगास्यूँ
  • खड़ी बोली और पूर्वी: कुछ शब्दों में

2. सरलता और सहजता: भाषा सरल, सहज और संगीतात्मक है। आम जनता आसानी से समझ सकती है।

3. भक्ति रस प्रधान: संपूर्ण रचना में भक्ति रस की प्रधानता है।

4. गेयता: पदों में संगीतात्मकता है, इन्हें गाया जा सकता है।

5. प्रतीकात्मकता: चाकर, बाग, कुसुम्बी साड़ी आदि प्रतीकों का प्रयोग।

6. पुनरुक्ति का प्रयोग: ‘ऊँचा-ऊँचा’, ‘बीच-बीच’ जैसे शब्दों का प्रयोग।

7. तद्भव शब्दों की प्रधानता: तत्सम के स्थान पर तद्भव शब्द – धर्‍यो (धारण), चीर (चीर), भीर (पीड़ा)।

8. दृश्य चित्रण: श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य और बृंदावन की लीलाओं का सुंदर चित्रण।

9. भावात्मकता: भावों की तीव्रता और गहनता।

10. लोकभाषा: लोकभाषा का सुंदर प्रयोग जो जन-जन तक पहुँच सकती है।

5 वे श्रीकृष्ण को पाने के लिए क्या-क्या कार्य करने को तैयार हैं?

मीराबाई श्रीकृष्ण को पाने के लिए निम्नलिखित कार्य करने को तैयार हैं:

1. चाकरी (सेवा) करना: वे श्याम की दासी बनकर उनकी सेवा करना चाहती हैं।

2. बाग लगाना: श्रीकृष्ण के लिए बगीचा लगाना और उसकी देखभाल करना।

3. प्रतिदिन दर्शन करना: नित्य प्रातः उठकर श्रीकृष्ण के दर्शन करना।

4. गोविंद लीला गाना: बृंदावन की गलियों में घूम-घूमकर गोविंद की लीलाएँ गाना।

5. निरंतर स्मरण: हर समय श्रीकृष्ण का स्मरण करना, उन्हें याद रखना।

6. भक्ति भाव में रहना: भाव-भक्ति की जागीरी (साम्राज्य) पाना।

7. साधारण वस्त्र धारण: कुसुम्बी साड़ी पहनकर साधारण वेश में रहना।

8. आधी रात को प्रभु दर्शन: आधी रात को यमुना के किनारे जाकर प्रभु के दर्शन करना।

9. सांसारिक सुखों का त्याग: सभी सांसारिक सुखों और मोह-माया को छोड़कर केवल श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन रहना।

निष्कर्ष: मीरा का हृदय अत्यंत व्याकुल है (घणो अधीरा)। वे अपने प्रभु गिरधर नागर के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। उनका एकमात्र उद्देश्य श्रीकृष्ण को पाना और उनके निकट रहना है।
(ख) काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए
1 हरि आप हरो जन री भीर। द्रौपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर। भगत कारण रूप नरहरि, धर्‍यो आप सरीर।

भाव सौंदर्य:

  • मीरा ने भक्त वत्सल भगवान की स्तुति की है
  • द्रौपदी और प्रह्लाद की रक्षा के उदाहरण प्रस्तुत किए हैं
  • भक्त की पीड़ा हरने की विनती
  • दैन्य भाव और समर्पण की भावना

शिल्प सौंदर्य:

  • भाषा: राजस्थानी मिश्रित हिंदी (री, भीर, राखी)
  • शैली: संबोधन शैली, विनय शैली
  • छंद: गेय पद शैली
  • अलंकार: अनुप्रास (हरि-हरो, आप-आप), उदाहरण अलंकार
  • रस: भक्ति रस
  • गुण: माधुर्य गुण
2 बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुंजर पीर। दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर।

भाव सौंदर्य:

  • गजराज (हाथी) को मगरमच्छ से बचाने की कथा का उल्लेख
  • मीरा ने स्वयं को दासी कहकर विनम्रता प्रकट की
  • अपनी पीड़ा हरने की प्रार्थना
  • पूर्ण समर्पण और विश्वास

शिल्प सौंदर्य:

  • भाषा: राजस्थानी मिश्रित हिंदी (बूढ़तो, राख्यो, म्हारी)
  • शब्द शक्ति: लक्षणा (गजराज = हाथी)
  • अलंकार: उदाहरण अलंकार, अनुप्रास (कुंजर-काटी)
  • रस: भक्ति रस
  • भाव

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