विशेषता: मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की प्रमुख कवयित्री, दैन्य और माधुर्य भाव की भक्ति
(क) प्रश्नों के उत्तर
1पहले पद में मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है?
हरि आप हरो जन री भीर।
द्रौपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रूप नरहरि, धर्यो आप सरीर।
बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुंजर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर॥
पहले पद में मीरा ने अत्यंत विनम्रता और भक्ति भाव से अपनी पीड़ा हरने की विनती की है:
1. ऐतिहासिक उदाहरण देकर: मीरा ने भगवान के पूर्व में भक्तों की रक्षा के उदाहरण प्रस्तुत किए हैं:
द्रौपदी की रक्षा: जब दुर्योधन ने द्रौपदी का चीरहरण करवाया, तब श्रीकृष्ण ने उनकी लाज बचाई और चीर को बढ़ाते रहे।
प्रह्लाद की रक्षा: भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए भगवान ने नरसिंह अवतार धारण किया।
गजराज की रक्षा: बूढ़े हाथी (गजराज) को मगरमच्छ के पीड़ा से मुक्ति दिलाई।
2. दासी भाव से: मीरा ने स्वयं को ‘दासी’ कहकर अत्यंत विनम्रता प्रकट की है।
3. पूर्ण समर्पण से: मीरा कहती हैं कि जिस प्रकार आपने अपने भक्तों की रक्षा की, उसी प्रकार मेरी पीड़ा भी दूर कीजिए। मैं आपकी दासी हूँ और पूर्णतः आप पर निर्भर हूँ।
2दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती हैं? स्पष्ट कीजिए।
मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया है:
1. वस्त्र और आभूषण:
मोर मुकुट: सिर पर मोर के पंखों का सुंदर मुकुट
पीताम्बर: पीले रेशमी वस्त्र जो उन्हें अत्यंत शोभा देते हैं
वैजयंती माला: गले में वैजयंती (पाँच रंगों के फूलों की माला)
कुसुम्बी साड़ी: कुसुम्बे के रंग की साड़ी
2. क्रियाकलाप:
धेनु चराना: वृंदावन में गायें चराना
मुरली वादन: मोहक मुरली बजाना
विभिन्न लीलाएँ: बृंदावन की गलियों में गोविंद लीला गाना
3. रंग-रूप:
साँवरिया: श्यामल (सांवले) रंग के
4. निवास स्थान: ऊँचा-ऊँचा महल और उसमें बीच-बीच में बारियाँ (बगीचे)
विशेषता: मीरा ने श्रीकृष्ण के रूप का वर्णन करते समय उनके प्रति अपने गहन प्रेम और आकर्षण को प्रकट किया है। हर विवरण में उनकी भक्ति और समर्पण झलकता है।
4मीराबाई की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।
मीराबाई की भाषा-शैली की प्रमुख विशेषताएँ:
1. मिश्रित भाषा:
राजस्थानी: री, म्हाने, राख्यो, घणो
ब्रज: गिरधारी, बृंदावन, गोविंद
गुजराती: पास्यूँ, रहस्यूँ, लगास्यूँ
खड़ी बोली और पूर्वी: कुछ शब्दों में
2. सरलता और सहजता: भाषा सरल, सहज और संगीतात्मक है। आम जनता आसानी से समझ सकती है।
3. भक्ति रस प्रधान: संपूर्ण रचना में भक्ति रस की प्रधानता है।
4. गेयता: पदों में संगीतात्मकता है, इन्हें गाया जा सकता है।
5. प्रतीकात्मकता: चाकर, बाग, कुसुम्बी साड़ी आदि प्रतीकों का प्रयोग।
6. पुनरुक्ति का प्रयोग: ‘ऊँचा-ऊँचा’, ‘बीच-बीच’ जैसे शब्दों का प्रयोग।
7. तद्भव शब्दों की प्रधानता: तत्सम के स्थान पर तद्भव शब्द – धर्यो (धारण), चीर (चीर), भीर (पीड़ा)।
8. दृश्य चित्रण: श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य और बृंदावन की लीलाओं का सुंदर चित्रण।
9. भावात्मकता: भावों की तीव्रता और गहनता।
10. लोकभाषा: लोकभाषा का सुंदर प्रयोग जो जन-जन तक पहुँच सकती है।
5वे श्रीकृष्ण को पाने के लिए क्या-क्या कार्य करने को तैयार हैं?
मीराबाई श्रीकृष्ण को पाने के लिए निम्नलिखित कार्य करने को तैयार हैं:
1. चाकरी (सेवा) करना: वे श्याम की दासी बनकर उनकी सेवा करना चाहती हैं।
2. बाग लगाना: श्रीकृष्ण के लिए बगीचा लगाना और उसकी देखभाल करना।
3. प्रतिदिन दर्शन करना: नित्य प्रातः उठकर श्रीकृष्ण के दर्शन करना।
4. गोविंद लीला गाना: बृंदावन की गलियों में घूम-घूमकर गोविंद की लीलाएँ गाना।
5. निरंतर स्मरण: हर समय श्रीकृष्ण का स्मरण करना, उन्हें याद रखना।
6. भक्ति भाव में रहना: भाव-भक्ति की जागीरी (साम्राज्य) पाना।
7. साधारण वस्त्र धारण: कुसुम्बी साड़ी पहनकर साधारण वेश में रहना।
8. आधी रात को प्रभु दर्शन: आधी रात को यमुना के किनारे जाकर प्रभु के दर्शन करना।
9. सांसारिक सुखों का त्याग: सभी सांसारिक सुखों और मोह-माया को छोड़कर केवल श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन रहना।
निष्कर्ष: मीरा का हृदय अत्यंत व्याकुल है (घणो अधीरा)। वे अपने प्रभु गिरधर नागर के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। उनका एकमात्र उद्देश्य श्रीकृष्ण को पाना और उनके निकट रहना है।
(ख) काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए
1हरि आप हरो जन री भीर। द्रौपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर। भगत कारण रूप नरहरि, धर्यो आप सरीर।
भाव सौंदर्य:
मीरा ने भक्त वत्सल भगवान की स्तुति की है
द्रौपदी और प्रह्लाद की रक्षा के उदाहरण प्रस्तुत किए हैं
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