Class 11 Hindi Chapter 6 Rajni Question Answer (NCERT Solutions)
Welcome to The Social Class. In this post, we provide comprehensive NCERT Solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 6. The chapter titled “Rajni” (रजनी) is a screenplay written by Mannu Bhandari. It highlights the issue of commercialization in education and the malpractice of forced tuitions in private schools.
Read Previous Chapters:
- Chapter 1: Namak Ka Daroga NCERT Solutions
- Chapter 2: Miya Nasiruddin NCERT Solutions
- Chapter 3: Appu Ke Saath Dhai Saal NCERT Solutions
- Chapter 4: Vidai Sambhashan NCERT Solutions
- Chapter 5: Galta Loha NCERT Solutions
NCERT Textbook Questions (Paath ke Saath)
उत्तर: (ग) वह अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने की सामर्थ्य रखती थी।
रजनी का चरित्र एक जुझारू महिला का है जो किसी भी गलत बात को बर्दाश्त नहीं करती। अमित के साथ जो हुआ (ट्यूशन न लेने के कारण नंबर काट लेना), वह उसे एक व्यक्तिगत समस्या न मानकर एक सामाजिक अन्याय मानती थी, इसलिए उसने इसे गंभीरता से लिया।
उत्तर: यह संवाद शिक्षा निदेशक (Director of Education) का है। यह तब बोला गया जब रजनी उनके पास स्कूलों में चल रहे ट्यूशन रैकेट की शिकायत लेकर गई थी।
तर्क: यह संवाद सैद्धांतिक रूप से सही लग सकता है, लेकिन व्यावहारिक धरातल पर यह गलत है।
- अमित जैसा होशियार बच्चा कमजोर नहीं था, फिर भी उसे ट्यूशन लेने के लिए मजबूर किया गया।
- जब शिक्षक अपनी ही कक्षा के बच्चों को ट्यूशन न पढ़ने पर कम नंबर देने की धमकी देते हैं, तो यह ‘मजबूरी’ बन जाती है।
- शिक्षा निदेशक का यह कहना उनकी जिम्मेदारी से भागने और सच्चाई से आँखें मूंदने को दर्शाता है।
(क) किसने किस प्रसंग में कही?
(ख) इससे कहने वाले की किस मानसिकता का पता चलता है?
(क) यह बात रजनी के पति (रवि) ने कही। यह उस समय कही गई जब पेरेंट्स की मीटिंग में रजनी ने भाषण देते हुए यह सुझाव दिया कि कम वेतन पाने वाले शिक्षकों को भी संगठित होकर आंदोलन करना चाहिए।
(ख) इससे पति की थोड़ी उदासीन और व्यंग्यात्मक मानसिकता का पता चलता है। वह रजनी के जुझारू स्वभाव को जानता है और मानता है कि रजनी हर बात में आंदोलन का मुद्दा ढूंढ लेती है। वह शुरू में रजनी के प्रयासों को बहुत गंभीरता से नहीं ले रहा था और उसे लगता था कि रजनी बेकार में मुसीबत मोल ले रही है।
(क) अमित का पर्चा सचमुच खराब होता।
(ख) संपादक रजनी का साथ न देता।
मुख्य समस्या: इस कड़ी की मुख्य समस्या शिक्षा का व्यवसायीकरण और स्कूलों में शिक्षकों द्वारा जबरदस्ती ट्यूशन थोपने का कुचक्र (रैकेट) है।
(क) यदि अमित का पर्चा सचमुच खराब होता: तो रजनी का विरोध आधारहीन हो जाता। उसकी सारी मेहनत बेकार जाती और उसे शर्मिंदा होना पड़ता। उसकी यह लड़ाई ‘अन्याय’ के खिलाफ थी, जो तभी संभव थी जब अमित ने पेपर अच्छा किया हो।
(ख) यदि संपादक रजनी का साथ न देता: तो यह मुद्दा केवल कुछ लोगों तक सीमित रह जाता। अखबार के माध्यम से ही यह बात जन-जन तक पहुँची और एक आंदोलन का रूप ले सकी। संपादक के साथ के बिना बोर्ड पर इतना दबाव नहीं पड़ता और नियम नहीं बदला जाता।
पाठ के आस-पास
उत्तर: इस संवाद के संदर्भ में, गलती करने वाले (भ्रष्ट शिक्षक और लापरवाह प्रशासन) तो गुनहगार हैं ही, लेकिन अन्याय को चुपचाप सहने वाले माता-पिता (जैसे अमित की माँ लीला) भी कम गुनहगार नहीं हैं।
हम उन्हें भी गुनहगार मानते हैं क्योंकि:
- उनका डर और चुप्पी ही भ्रष्ट लोगों का हौसला बढ़ाती है।
- यदि वे पहली बार में ही विरोध करें, तो अन्याय आगे नहीं बढ़ेगा।
- “हमें क्या करना है” की सोच समाज में बुराई को पनपने देती है। जैसा कि रजनी कहती है, अन्याय सहना उसे बढ़ावा देने जैसा ही है।
उत्तर: भारतीय समाज में स्त्री की बनी-बनाई धारणा अक्सर एक सहनशील, कोमल और घर-गृहस्थी तक सीमित महिला की होती है जो विवादों से दूर रहती है।
रजनी का चेहरा इससे बिल्कुल अलग है क्योंकि:
- वह जुझारू और निडर है। वह हेडमास्टर और शिक्षा निदेशक जैसे अधिकारियों से बेबाकी से बहस करती है।
- वह अन्याय को चुपचाप नहीं सहती, बल्कि उसके खिलाफ आंदोलन खड़ा करती है।
- वह केवल अपने परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के व्यापक हित (अमित और अन्य बच्चों) के लिए लड़ती है।
- वह अपने पति की सलाह (चुप रहने) को ठुकराकर अपने विवेक से काम लेती है।
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