Class 11 Hindi Chapter 10 Meera Ke Pad Question Answer (NCERT Solutions)
Class 11 Hindi Chapter 10 Meera Ke Pad Question Answer (NCERT Solutions)
Welcome to The Social Class. In this post, we provide detailed NCERT Solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 10. This chapter features the verses (Pad) of Meera Bai, a prominent saint of the Bhakti movement. Her poetry expresses her deep devotion and unconditional love for Lord Krishna.
Read Previous Chapters:
- Chapter 6: Rajni Question Answer
- Chapter 7: Jamun Ka Ped Question Answer
- Chapter 8: Bharat Mata Question Answer
- Chapter 9: Kabir Ke Pad Question Answer
NCERT Textbook Questions (Pad Ke Saath)
उत्तर: मीरा श्रीकृष्ण की उपासना ‘पति’ (स्वामी) के रूप में करती हैं। वह कहती हैं, “मेरो तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई”।
रूप: मीरा के आराध्य का रूप मनमोहक है। उन्होंने अपने सिर पर मोर-मुकुट धारण किया हुआ है। वे गायों के पालक (गोपाल) और गोवर्धन पर्वत को उठाने वाले (गिरधर) हैं। मीरा ने उन्हें अपना सब कुछ मान लिया है।
(क) अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी
अब त बेलि फैलि गयी, आणंद-फल होयी
भाव-सौंदर्य: इन पंक्तियों में मीरा की अनन्य भक्ति और त्याग का वर्णन है। मीरा कहती हैं कि उन्होंने अपने आंसुओं (विरह वेदना) के जल से सींच-सींच कर कृष्ण प्रेम रूपी बेल को बड़ा किया है। अब यह प्रेम-बेल पूरी तरह फैल गई है और इस पर ‘आनंद’ रूपी फल लगने लगे हैं, अर्थात् उन्हें अब ईश्वर भक्ति में परम सुख मिल रहा है।
शिल्प-सौंदर्य:
- रूपक अलंकार: ‘प्रेम-बेलि’ (प्रेम रूपी बेल) और ‘आणंद-फल’ (आनंद रूपी फल)।
- पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार: ‘सींचि-सींचि’ में एक ही शब्द का दोहराव है।
- भाषा: राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा का सुंदर प्रयोग है।
(ख) दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से विलोयी
दधि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दयी छोयी
भाव-सौंदर्य: मीरा ने संसार का चिंतन-मनन करके यह निष्कर्ष निकाला है कि ईश्वर भक्ति ही सार (तत्व) है। जैसे दही को मथकर घी निकाल लिया जाता है और छाछ (सारहीन हिस्सा) को छोड़ दिया जाता है, वैसे ही मीरा ने संसार से भक्ति रूपी ‘घी’ को अपना लिया है और सांसारिक मोह-माया रूपी ‘छाछ’ को त्याग दिया है।
शिल्प-सौंदर्य:
- प्रतीकात्मकता: ‘घी’ भक्ति का और ‘छाछ’ निस्सार संसार का प्रतीक है।
- अन्योक्ति अलंकार: बात को उदाहरण के माध्यम से कहा गया है।
- भाषा: ‘विलोयी’, ‘छोयी’ जैसे तुकांत शब्दों से पद में गेयता (संगीतात्मकता) आई है।
उत्तर: मीरा जगत (संसार) के लोगों को मोह-माया और व्यर्थ के सांसारिक कार्यों में लिप्त देखकर रोती हैं।
उन्हें दुख होता है कि लोग अनमोल मानव जीवन को ईश्वर भक्ति में लगाने के बजाय खाने-पीने और भोग-विलास में नष्ट कर रहे हैं। संसार की इस अज्ञानता और दुर्दशा को देखकर मीरा को रोना आता है, जबकि भक्तों को देखकर वे प्रसन्न होती हैं।
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