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Class 11 Hindi Chapter 13 Ghazal Question Answer (NCERT Solutions)

Class 11 Hindi Chapter 13 Ghazal Question Answer | NCERT Solutions

Class 11 Hindi Chapter 13 Ghazal Question Answer (NCERT Solutions)

Welcome to The Social Class. In this post, we provide detailed NCERT Solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 13. This chapter features a famous Ghazal by the revolutionary poet Dushyant Kumar, taken from his collection ‘Saaye Mein Dhoop’. The ghazal is a powerful satire on the socio-political system and the apathy of the common man.

NCERT Textbook Questions (Ghazal Ke Saath)

प्रश्न 1. आखिरी शेर में ‘गुलमोहर’ की चर्चा हुई है। क्या उसका आशय एक खास तरह के फूलदार वृक्ष से है या उसमें कोई सांकेतिक अर्थ निहित है? समझाकर लिखें।

उत्तर: यहाँ ‘गुलमोहर’ का प्रयोग केवल एक फूलदार वृक्ष के अर्थ में नहीं, बल्कि एक सांकेतिक अर्थ में हुआ है।

  • ‘गुलमोहर’ यहाँ मानवीय मूल्यों, स्वाभिमान, सपनों और आदर्शों का प्रतीक है।
  • कवि कहना चाहता है कि यदि हम जिएं, तो अपने आदर्शों और मानवीय मूल्यों (अपने बगीचे) के साथ जिएं।
  • और यदि मरें, तो दूसरों की भलाई और समाज के लिए (गैर की गलियों में) संघर्ष करते हुए मरें। यह शब्द व्यक्ति के निजी सुख और सामाजिक दायित्व दोनों को सुंदरता से व्यक्त करता है।
प्रश्न 2. पहले शेर में ‘चिराग’ शब्द एक बार बहुवचन में आया है और दूसरी बार एकवचन में। अर्थ एवं काव्य-सौंदर्य की दृष्टि से इसका क्या महत्व है?

उत्तर:

  • चिरागाँ (बहुवचन): इसका अर्थ है ‘ढेर सारे दीपक’ या अत्यधिक रोशनी। यह जन-सुविधाओं और खुशहाली की प्रचुरता का प्रतीक है जो नेताओं ने हर घर के लिए देने का वादा किया था।
  • चिराग (एकवचन): इसका अर्थ है ‘एक दीपक’ या थोड़ी सी रोशनी। यह न्यूनतम आवश्यकताओं का प्रतीक है।
काव्य-सौंदर्य: इन दोनों के प्रयोग से कवि ने एक तीखा विरोधाभास (Contrast) उत्पन्न किया है। वह बताता है कि जहाँ हर घर को रोशन करने (बड़े-बड़े वादों) की बात थी, वहाँ अब पूरे शहर के लिए एक चिराग (छोटी सी सुविधा) भी उपलब्ध नहीं है। यह व्यवस्था की विफलता को बहुत प्रभावी ढंग से उजागर करता है।

प्रश्न 3. गज़ल के तीसरे शेर को गौर से पढ़ें। यहाँ दुष्यंत का इशारा किस तरह के लोगों की ओर है?
“न हो कमीज़ तो पाँवों से पेट ढँक लेंगे,
ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए।”

उत्तर: यहाँ दुष्यंत का इशारा भारत की गरीब, शोषित और संघर्षहीन जनता की ओर है।

ये वे लोग हैं जो अपने अधिकारों के लिए लड़ते नहीं हैं, बल्कि अभावों में जीना सीख लेते हैं। अगर उनके पास पहनने को कमीज़ नहीं है (साधन नहीं हैं), तो वे विरोध करने के बजाय अपने पैरों से पेट ढँककर (समझौता करके) चुपचाप सो जाते हैं। शासक वर्ग के लिए ऐसे ही ‘गूंगे और बहरे’ लोग मुनासिब (उपयुक्त) होते हैं क्योंकि इनसे उनकी सत्ता को कोई खतरा नहीं होता।

प्रश्न 4. आशय स्पष्ट करें:
“तेरा निज़ाम है सिल दे ज़ुबान शायर की,
ये एहतियात ज़रूरी है इस बहर के लिए।”

उत्तर:

  • तेरा निज़ाम है: इसका अर्थ है ‘तुम्हारा शासन’ या सत्ता। कवि शासक वर्ग को संबोधित कर रहा है।
  • सिल दे ज़ुबान शायर की: सत्ताधारी लोग अक्सर कवियों और विरोधियों की आवाज़ को दबाना (सेंसरशिप लगाना) चाहते हैं ताकि उनकी कमियां बाहर न आएं।
  • ये एहतियात ज़रूरी है इस बहर के लिए: जिस प्रकार गज़ल के छंद (बहर) को सही रखने के लिए शब्दों का बंधन ज़रूरी है, उसी प्रकार शासक को लगता है कि अपनी सत्ता (निज़ाम) को बनाए रखने के लिए विद्रोह की आवाज़ को कुचलना ज़रूरी है।
सारांश: यह शेर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किए जाने वाले हमलों और सत्ता की तानाशाही पर करारा व्यंग्य है।

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Chapter 1: Namak Ka Daroga | Chapter 2: Miya Nasiruddin | Chapter 5: Galta Loha

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