Class 11 Hindi Chapter 14 Akkamahadevi Question Answer (NCERT Solutions)
Class 11 Hindi Chapter 14 Akkamahadevi Question Answer (NCERT Solutions)
Welcome to The Social Class. In this post, we provide detailed NCERT Solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 14. This chapter features the Vachanas (poems) of the famous Kannada saint-poetess Akkamahadevi. In her first poem, “Hey Bhookh Mat Machal”, she urges her senses to stay calm, and in the second, “Hey Mere Juhi Ke Phool Jaise Ishwar”, she prays for total surrender to God (Channamallikarjuna).
Read Previous Chapters:
- Chapter 7: Jamun Ka Ped
- Chapter 9: Kabir Ke Pad
- Chapter 10: Meera Ke Pad
- Chapter 11: Ghar Ki Yaad
- Chapter 12: Champa Kale Kale Achhar Nahi Cheenhati
- Chapter 13: Ghazal (Saaye Mein Dhoop)
NCERT Textbook Questions (Vachan Ke Saath)
उत्तर: कवयित्री का मानना है कि ईश्वर भक्ति के मार्ग में हमारी इंद्रियाँ (भूख, प्यास, नींद, मोह, लोभ आदि) सबसे बड़ी बाधा हैं।
- भूख और प्यास इंसान को शारीरिक सुखों में उलझाए रखती हैं।
- नींद उसे आलसी बना देती है।
- क्रोध और लोभ उसके विवेक को नष्ट कर देते हैं।
- मोह उसे सांसारिक बंधनों में जकड़े रखता है।
जब तक मनुष्य इन इंद्रियों के वश में रहता है, वह अपना पूरा ध्यान ईश्वर (लक्ष्य) पर केंद्रित नहीं कर पाता। इसलिए लक्ष्य प्राप्ति के लिए इंद्रियों पर नियंत्रण रखना आवश्यक है।
उत्तर: इस पंक्ति में कवयित्री संसार के सभी जड़ और चेतन प्राणियों (चराचर) को संबोधित कर रही हैं।
आशय: कवयित्री कहती हैं कि मानव जीवन बहुत अनमोल है और यह बड़ी मुश्किल से मिलता है। यह समय इंद्रियों के सुख भोगने का नहीं, बल्कि ईश्वर (शिव/चन्नमल्लिकार्जुन) को पाने का है। इसलिए, हे सांसारिक लोगों! तुम अपने अहंकार और मोह को त्यागकर इस सुनहरे अवसर को मत खोओ और ईश्वर की भक्ति में लीन हो जाओ।
उत्तर: कवयित्री ने ईश्वर के लिए ‘जूही के फूल’ (Juhi flower) के दृष्टांत (उपमान) का प्रयोग किया है।
साम्य का आधार:
- कोमलता: जैसे जूही का फूल बहुत कोमल होता है, वैसे ही ईश्वर भी दयालु और कोमल हृदय वाले हैं।
- सुगंध: फूल अपनी सुगंध चारों ओर फैलाता है, वैसे ही ईश्वर की कृपा सर्वत्र व्याप्त है।
- नश्वरता से परे: फूल नश्वर है, लेकिन ईश्वर की कोमलता और प्रेम शाश्वत है। कवयित्री ईश्वर को अपने जीवन में फूल जैसी ताजगी और पवित्रता का स्रोत मानती हैं।
उत्तर: यहाँ ‘अपना घर’ से तात्पर्य सांसारिक मोह-माया, अहंकार और ‘मैं’ (Ego) की भावना से है।
कवयित्री इसे भूलने की बात इसलिए कहती हैं क्योंकि जब तक मनुष्य ‘मेरा घर’, ‘मेरा परिवार’ और ‘मेरी संपत्ति’ के चक्कर में फँसा रहता है, तब तक वह ईश्वर को प्राप्त नहीं कर सकता। ईश्वर का घर (भक्ति का मार्ग) पाने के लिए अपने सांसारिक घर (मोह) का त्याग करना अनिवार्य है।
उत्तर: दूसरे वचन में कवयित्री ने ईश्वर से यह कामना की है कि उनका सब कुछ छिन जाए और उनका अहंकार पूरी तरह नष्ट हो जाए।
वे चाहती हैं कि:
- उन्हें भीख मांगनी पड़े और कोई भीख भी न दे।
- अगर कोई कुछ देने आए, तो वह नीचे गिर जाए।
- और अगर वे उसे उठाने झुकें, तो कोई कुत्ता उसे झपट कर ले जाए।
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