Class 11 Hindi Chapter 16 Aao Milkar Bachayein Question Answer (NCERT Solutions)
Class 11 Hindi Chapter 16 Aao Milkar Bachayein Question Answer (NCERT Solutions)
Welcome to The Social Class. In this post, we provide detailed NCERT Solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 16. The poem “Aao Milkar Bachayein” (आओ, मिलकर बचाएँ) is written by the Santhali poetess Nirmala Putul. It is a heartfelt appeal to save the tribal culture, nature, and simple lifestyle of Jharkhand from the harmful effects of urbanization.
Read Previous Chapters:
- Chapter 11: Ghar Ki Yaad Question Answer
- Chapter 12: Champa Kale Kale Achhar Nahi Cheenhati
- Chapter 13: Ghazal Question Answer
- Chapter 14: Akkamahadevi Question Answer
- Chapter 15: Sabse Khatarnak Question Answer
NCERT Textbook Questions (Kavita Ke Saath)
उत्तर: ‘माटी का रंग’ का प्रयोग करके कवयित्री ने अपने मूल लोक-संस्कृति और परिवेश की ओर संकेत किया है।
वे चाहती हैं कि झारखंड के लोगों के व्यवहार, भाषा और जीवनशैली में उनकी अपनी मिट्टी की पहचान (संथाली संस्कृति) बनी रहे। वे शहरी संस्कृति की नकल करने के बजाय अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहें।
उत्तर: ‘भाषा में झारखंडीपन’ से अभिप्राय है—झारखंड की स्थानीय बोली और भाषा का स्वाभाविक स्वरूप।
कवयित्री चाहती हैं कि लोग अपनी मातृभाषा (संथाली) को न भूलें। उनकी बोली में वही खड़ापन, मिठास और देहाती सुर बना रहे जो उनकी पहचान है। शहरी प्रभाव के कारण उनकी भाषा का मूल स्वरूप नष्ट नहीं होना चाहिए।
उत्तर: कवयित्री मानती हैं कि आदिवासी समाज स्वभाव से बहुत भोला है, जिसका शहरी लोग फायदा उठाते हैं। इसलिए, केवल भोलेपन से काम नहीं चलेगा।
- अक्खड़पन: ताकि वे अपनी बात पर अडिग रह सकें और स्वाभिमान के साथ जी सकें।
- जुझारूपन: ताकि वे अपने अधिकारों, संस्कृति और जंगल को बचाने के लिए संघर्ष कर सकें।
शहरी शोषण और चालाकी का सामना करने के लिए भोलेपन के साथ-साथ संघर्ष करने की क्षमता (जुझारूपन) भी उतनी ही ज़रूरी है।
उत्तर: कविता में आदिवासी समाज की निम्नलिखित बुराइयों की ओर संकेत किया गया है:
- शराब की लत: ‘हड़िया’ (स्थानीय शराब) के बढ़ते चलन के कारण युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है।
- अशिक्षा और कुरीतियाँ: समाज में अशिक्षा के कारण अंधविश्वास और कुरीतियाँ व्याप्त हैं।
- परंपराओं का ह्रास: शहरी संस्कृति के प्रभाव में आकर वे अपनी मौलिकता और लोक-जीवन की सादगी खोते जा रहे हैं।
उत्तर: इसका आशय है कि यद्यपि शहरीकरण और विकास के नाम पर बहुत कुछ नष्ट हो चुका है, फिर भी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है।
आज भी लोगों में थोड़ी सी उम्मीद, थोड़ा सा विश्वास और थोड़े से सपने बाकी हैं। प्रकृति (पहाड़, नदियाँ, हवा) अभी पूरी तरह नष्ट नहीं हुई है। यदि हम सब मिलकर प्रयास करें, तो अपनी संस्कृति और पर्यावरण के बचे हुए हिस्सों को संरक्षित कर सकते हैं। यह पंक्ति आशावाद (Optimism) को दर्शाती है।
(क) ठंडी होती दिनचर्या में, जीवन की गर्माहट
भाव सौंदर्य: यहाँ ‘ठंडी होती दिनचर्या’ शहरी जीवन की सुस्ती, उत्साहहीनता और मशीनीपन का प्रतीक है, जबकि ‘जीवन की गर्माहट’ उत्साह, उमंग और क्रियाशीलता का प्रतीक है। कवयित्री चाहती हैं कि आदिवासी जीवन का उत्साह बना रहे।
शिल्प सौंदर्य: लाक्षणिक प्रयोग है। ‘ठंडी’ और ‘गर्माहट’ में विरोधाभास (Contrast) है जो कथन को प्रभावशाली बनाता है।
(ख) थोड़ा-सा विश्वास, थोड़ी-सी उम्मीद, थोड़े-से सपने, आओ, मिलकर बचाएँ।
भाव सौंदर्य: यह पंक्तियाँ घोर निराशा के बीच आशा की किरण जगाती हैं। यह सामूहिक प्रयास का आह्वान करती हैं।
शिल्प सौंदर्य: ‘थोड़ा-सा’, ‘थोड़ी-सी’, ‘थोड़े-से’ में शब्दों की आवृत्ति से लय उत्पन्न हुई है। भाषा अत्यंत सरल और उर्दू मिश्रित हिंदी (जैसे- उम्मीद, विश्वास) है।
उत्तर: बस्तियों को शहर की प्रदूषित और संवेदनहीन आबो-हवा (वातावरण) से बचाने की आवश्यकता है।
शहर की आबो-हवा का अर्थ है:
- भौतिकतावाद और कृत्रिमता।
- भावनाओं की कमी और अलगाव।
- ‘नंगी’ होने की प्रवृत्ति (वृक्षों की कटाई से धरती का नंगा होना और संस्कृति/मर्यादा का ह्रास)।
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Chapter 1: Namak Ka Daroga | Chapter 5: Galta Loha | Chapter 8: Bharat Mata
