Class 11 Hindi Chapter 4 Vidai Sambhashan Question Answer (NCERT Solutions)
Welcome to The Social Class. In this post, we provide accurate and easy-to-understand NCERT Solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 4. The chapter titled “Vidai Sambhashan” (विदाई-संभाषण) is a satirical piece by Balmukund Gupta addressed to Lord Curzon, describing the emotions and irony surrounding his resignation and departure from India.
Read Previous Chapters:
- Chapter 1: Namak Ka Daroga NCERT Solutions
- Chapter 2: Miya Nasiruddin NCERT Solutions
- Chapter 3: Appu Ke Saath Dhai Saal NCERT Solutions
NCERT Textbook Questions (Paath ke Saath)
उत्तर: शिवशंभु की दो गायों की कहानी के माध्यम से लेखक भारत की संस्कृति और यहाँ के लोगों की उदारता को व्यक्त करना चाहते हैं।
कहानी में दो गायें थीं—एक बलवान और एक कमजोर। बलवान गाय अक्सर कमजोर गाय को टक्कर मारती थी। लेकिन जब बलवान गाय को पुरोहित को दान दे दिया गया, तो कमजोर गाय प्रसन्न होने के बजाय दुखी हो गई और उसने चारा भी नहीं खाया।
इसके जरिए लेखक यह बताना चाहते हैं कि भारत में बिछड़ने का समय बहुत पवित्र और कोमल होता है। यहाँ के लोग (और पशु भी) अपने वैर-भाव भूलकर विदाई के समय उदास हो जाते हैं। लेखक व्यंग्य करते हैं कि भारत में पशुओं में भी इतनी संवेदना है, लेकिन लॉर्ड कर्जन जैसा मनुष्य होकर भी भारतीय जनता के प्रति कोई संवेदना नहीं रखता।
उत्तर: यहाँ ‘बंग-भंग’ (बंगाल विभाजन) की ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है।
लॉर्ड कर्जन ने अपनी जिद्द के कारण 1905 में बंगाल का विभाजन कर दिया था। उस समय भारत की आठ करोड़ जनता ने बार-बार प्रार्थना की थी कि बंगाल का बंटवारा न किया जाए, लेकिन कर्जन ने जनता की एक न सुनी और अपनी तानाशाही चलाई। यह घटना भारत के इतिहास में एक दुखद अध्याय है।
उत्तर: लॉर्ड कर्जन को इस्तीफ़ा निम्नलिखित कारणों से देना पड़ा:
- कर्जन एक फौजी अफसर को अपनी इच्छा के अनुसार एक विशेष पद पर नियुक्त करना चाहते थे।
- ब्रिटिश सरकार ने उनकी इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
- गुस्से में आकर कर्जन ने इस्तीफ़ा देने की धमकी दी।
- उन्हें उम्मीद थी कि सरकार झुक जाएगी, लेकिन सरकार ने उनका इस्तीफ़ा मंजूर कर लिया। इस अपमान के कारण उन्हें भारत छोड़कर जाना पड़ा।
उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि लॉर्ड कर्जन का भारत में अत्यंत ऊँचा स्थान था, लेकिन अंत में उनकी स्थिति बहुत दयनीय हो गई।
- शान (पहले): कर्जन की कुर्सी सोने की थी। जुलूस में उनका हाथी सबसे आगे और सबसे ऊँचा होता था। ईश्वर और इंग्लैंड के महाराज के बाद भारत में उन्हीं का दर्जा था। बड़े-बड़े राजा-महाराजा उनके सामने हाथ जोड़कर खड़े रहते थे।
- पतन (बाद में): अंत में स्थिति ऐसी हो गई कि एक फौजी अफसर को नियुक्त करवाने की उनकी सिफारिश तक नहीं मानी गई। उन्हें अपमानित होकर इस्तीफ़ा देना पड़ा। जिस शासक के इशारे पर देश चलता था, उसे खुद बेबसी में जाना पड़ा।
उत्तर: यहाँ ‘तीसरी शक्ति’ से लेखक का तात्पर्य ब्रिटिश साम्राज्य की सर्वोच्च सत्ता (ईश्वर या इंग्लैंड की महारानी/सरकार) से है।
लॉर्ड कर्जन भारत के वायसराय थे और भारतीय जनता उनकी प्रजा थी। कर्जन को लगता था कि वे ही सर्वशक्तिमान हैं। लेकिन लेखक याद दिलाते हैं कि एक ऐसी शक्ति भी है जो कर्जन से भी ऊपर है और जिसका नियंत्रण न तो भारतवासियों पर है और न ही कर्जन पर। उसी शक्ति (ब्रिटिश सरकार) ने कर्जन का इस्तीफ़ा मंजूर करके उनका घमंड तोड़ दिया।
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